ज्योतिष के मुताबिक यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य बली है तो जातक अपने जीवन में सभी लक्ष्यों की प्राप्ति करता है। जातक के अंदर गजब का साहस देखने को मिलता है। इसके साथी वह प्रतिभावान व नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होता है। जीवन में उसे मान सम्मान की कमी नहीं होती। जातक ऊर्जावान, आत्म-विश्वासी व आशावादी होगा। जातक उपस्थिति के कारण घर में ख़ुशी, आनंद का माहौल बना रहा है। जातक दयालु होता है। रहन सहन शाही हो जाती है। ऐसे जातक अपने कार्य व संबंधों के प्रति काफी वफ़ादार होते हैं। कुंडली में सूर्य (sun) का उच्च व प्रभावी होना सरकारी नौकरी की ओर इशारा करता है। जातक जीवन में उच्च पद प्राप्त करता है।

जिस जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित होते हैं या प्रभावी नहीं होते हैं उन जातकों पर इसका गहरा असर पड़ता है। ऐसे में जातक अहंकारी हो जाता है। क्रोध जातक की नाक पर सवार रहती है। जिसके कारण उसके कई काम बिगड़ जाते हैं। जातक छोटी –छोटी बातों को लेकर उदास हो जाते हैं। इसके साथ ही वे किसी पर भी  विश्वास नहीं कर पाते हैं। जातकों के अंदर ईर्ष्या व्याप्त हो जाता है। जातक महत्वाकांक्षी होने के साथ आत्म केंद्रित भी बन जाते हैं। जिसके कारण इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा में भी कमी आती है।

सूर्य गृह कुंडली का मुख्य तथा प्रधान गृह होता है! लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह को सबसे प्रभावशाली ग्रह माना गया है। यह सभी ग्रहों को अधिपति गृह होता है| यह सभी ग्रहों का स्वामी कहलाता है। लाल किताब के अनुसार सूर्य का 12 भावों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से पड़ता है। हालाँकि सूर्य ग्रह शांति के लिए लाल किताब के उपाय बहुत ही कारगर होते हैं। वैदिक ज्योतिष से अलग लाल किताब में सूर्य के प्रभाव और इससे संबंधित टोटके बताए गए हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि कुंडली के 12 भाव में लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है और इसके क्या उपाय हैं। नीचे प्रत्येक प्रभाव भाव पर सूर्य का प्रभाव और उससे संबंधित उपाय दिए गए हैं:

लाल किताब में सूर्य ग्रह का महत्व

जिस प्रकार वैदिक ज्योतिष में सूर्य को एक प्रमुख ग्रह माना गया है उसी प्रकार लाल किताब में भी सूर्य को उतना ही महत्व दिया गया है। पुराणों में सूर्य को देवता कहा गया है जो समस्त संसार की आत्मा है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है और यह सिंह राशि का स्वामी है। मेष इसकी उच्च राशि है जबकि तुला राशि में यह नीच भाव में माना जाता है। वहीं चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र ग्रह हैं। जबकि शुक्र और शनि इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। सूर्य के शुभ फल पाने तथा इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए बेल की जड़, माणिक्य रत्न अथवा एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने विधि ज्योतिष में बतायी गई है।

सूर्य अपने मित्र ग्रहों के साथ होता है तो यह जातकों को शुभ फल देता है। जबकि शत्रु ग्रहों के साथ इसके फल अच्छे नहीं होते हैं। ऐसा कहते हैं कि सूर्य के समीप आने पर किसी भी ग्रह का प्रभाव शून्य हो जाता है, इसलिए कई बार ऐसा होता है कि सू्र्य के प्रभाव में आने के कारण संबंधित ग्रह अपनी प्रकृति के अनुसार परिणाम नही दे पाते हैं। सूर्य गोचर के दौरान क़रीब एक महीने में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस कारण संपूर्ण राशि चक्र को पूरा करने में सूर्य 12 माह अर्थात एक वर्ष लगाता है। यह अन्य ग्रहों की तरह वक्री नहीं होता है।

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह के कारकत्व

सूर्य को जातक की कुंडली में सम्मान, सफलता, प्रगति एवं सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में उच्च सेवा का कारक माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा तथा पिता का कारक भी कहा गया है। सूर्य सभी ग्रहों का राजा होता है अर्थात यह नेतृत्व का प्रतीक है। पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूर्य ही है। इसलिए सूर्य को ऊर्जा का भी कारक माना जाता है। इसके अलावा सूर्य ग्रह आत्मा का कारक होता है। मनुष्य के शरीर में सूर्य उसके हृदय को दर्शाता है। साथ ही यह पुरुषों की दायीं आँख जबकि महिलाओं की बायीं आँख का प्रतिनिधित्व करता है। पीड़ित सूर्य के कारण जातकों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अतः यह लो ब्लड प्रेशर, चेहरे पर मुहांसे, तेज़ बुखार, टाइफाइड, मिर्गी एवं पित्त, हृदय या हड्डी से संबंधित रोगों का कारक है।

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह का संबंध

सूर्य ग्रह का संबंध भगवान विष्णु जी है। शास्त्रों में ऐसा वर्णित है कि सूर्य ग्रह भगवान विष्णु जी का प्रतीक हैं जो कि रथ पर सवार हैं। लाल किताब में सूर्य ग्रह का संबंध तांबा, तांबे से संबंधित वस्तुएँ, काली कपिला गाय, इकलौता पुत्र, सख़्त राजा, बहादुर, नीतिवान, क्षत्रिय, राजपूत, माणिक पत्थर, तेज फल, गेहूँ, बाजरा, शिलाजीत, भूरी भैंस आदि से है।

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह के प्रभाव

यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य बली हो तो जातक को इसके सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। वहीं यदि कुंडली में सूर्य पीड़ित हो तो जातक को इसके नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ते हैं। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में बली होगा जिसके कारण जातकों को अच्छे फल प्राप्त होंगे। वहीं सूर्य अपनी नीच राशि तुला में होगा तो जातक को अशुभ फल मिलेंगे। इसके अतिरिक्त मित्र ग्रहों (चंद्रमा, मंगल, गुरु) के साथ सूर्य शक्तिशाली होता है। अतः यह स्थिति जातकों के लिए शुभ होती है। जबकि शत्रु ग्रहों के साथ होने पर सूर्य जातकों के लिए हानिकारक हो जाता है। आइए जानते हैं किस प्रकार से सूर्य के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव क्या हैं:

  • सकारात्मक प्रभाव – जिस जातक की कुंडली में सूर्य उच्च में होता है तो वह जातक स्वयं के बल पर कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति की राह में जितनी रुकावटें आती हैं वह उन रुकावटों को अवसरों परिवर्तन कर आगे बढ़ता है और उसके शत्रुओं का नाश होता है। सूर्य का सकारात्मक प्रभाव जातकों को समाज में मान-सम्मान दिलाता है। इसके साथ ही सरकारी क्षेत्र में जातक उच्च पद की प्राप्ति करता है। इसके अलावा सूर्य के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति समाज का नेतृत्व करता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जातक सदैव ऊर्जावान बना रहता है और उसके साहस में वृद्धि होती है। सूर्य का सकारात्मक प्रभाव जातकों की आभा को तेजवान बनाता है।
  • नकारात्मक प्रभाव – सूर्य ग्रह का नकारात्मक प्रभाव जातक को अहंकारी बनाता है। जातक अपने से संबंधित चीज़ों को लेकर घमंडी हो जाता है। इसके साथ सूर्य का नकारात्मक प्रभाव जातक को विश्वासहीन, ईर्ष्यालु, क्रोधी, महत्वाकांक्षी, आत्म केंद्रित, क्रोधी आदि बनाता है। वहीं पीड़ित सूर्य का प्रभाव पिताजी से संबंधों को ख़राब करता है। इस दौरान छोटी-छोटी बातों को लेकर पिताजी से झगड़ा अथवा उनसे मतभेद बना रहता है। अगर इसी को पिता के नज़रिए से देखें तो पीड़ित सूर्य के कारण पिता के संबंध पुत्र से ठीक नहीं रहते हैं। पीड़ित सूर्य का प्रभाव जातकों के वैवाहिक जीवन पर भी नकारात्मक असर डालता है।

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह शांति के टोटके/उपाय

ज्योतिष में लाल किताब के उपाय को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अतः लाल किताब में सूर्य ग्रह शांति के टोटके जातकों के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। ये उपाय बहुत सरल होते हैं। अतः इन्हें कोई भी व्यक्ति आसानी से स्वयं कर सकता है। सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब के उपाय करने से जातकों को सूर्य के सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब के उपाय निम्नलिखित हैंः

  • पति-पत्नी में से किसी एक को गुड़ से परहेज करना चाहिए
  • मुफ्त की चीज़ न लें।
  • माँ का आशीर्वाद सदैव लें और चावल-दूध का दान करें।
  • अंधे व्यक्ति की सहायता करें।
  • दूसरों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करें।
  • पिता की सेवा सम्मानपूर्वक करे |

लाल किताब के उपाय ज्योतिष विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। अतः ज्योतिष में इस पुस्तक को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उम्मीद है कि सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब में दी गई यह जानकारी आपके कार्य को सिद्ध करने में सफल होगी।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह विस्तार मे

ज्योतिष में सूर्य ग्रह का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म में सूर्य को देवता का स्वरूप मानकर इसकी आराधना की जाती है। यह धरती पर ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को तारों का जनक माना जाता है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्रमशः बुध और शुक्र के बाद सबसे कम है। इसका आकार सभी ग्रहों से बहुत विशाल है। सौर मंडल में यह केन्द्र में स्थित है। यद्यपि खगोलीय दृष्टि से सूर्य एक तारा है। लेकिन वैदिक ज्योतिष में यह एक महत्वपूर्ण और प्रमुख ग्रह है। जन्म कुंडली के अध्ययन में सूर्य की अहम भूमिका होती है।

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में सूर्य को देवता माना गया है जिसके अनुसार, सूर्य समस्त जीव-जगत के आत्मा स्वरूप हैं। इसके द्वारा व्यक्ति को जीवन, ऊर्जा एवं बल की प्राप्ति होती है। प्रचलित मान्यता के अनुसार सूर्य महर्षि कश्यप के पुत्र हैं। माता का नाम अदिति होने के कारण सूर्य का एक नाम आदित्य भी है। ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा का कारक कहा गया है। इसके चिकित्सीय और आध्यात्मिक लाभ को पाने के लिए लोग प्रातः उठकर सूर्य नमस्कार करते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार रविवार का दिन सूर्य ग्रह के लिए समर्पित है जो कि सप्ताह का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

हिन्दू ज्योतिष में सूर्य ग्रह जब किसी राशि में प्रवेश करता है तो वह धार्मिक कार्यों के लिए बहुत ही शुभ समय होता है। इस दौरान लोग आत्म शांति के लिए धार्मिक कार्यों का आयोजन कराते हैं तथा सूर्य की उपासना करते हैं। विभिन्न राशियों में सूर्य की चाल के आधार पर ही हिन्दू पंचांग की गणना संभव है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है तो उसे एक सौर माह कहते हैं। राशिचक्र में 12 राशियाँ होती हैं। अतः राशिचक्र को पूरा करने में सूर्य को एक वर्ष लगता है। अन्य ग्रहों की तरह सूर्य वक्री नहीं करता है। सूर्य हमारे जीवन से अंधकार को नष्ट करके उसे प्रकाशित करता है। यह हमें सदैव सकारात्मक चीज़ों की ओर प्रेरित करता है। इसकी किरण मनुष्यों के लिए आशा की किरण होती हैं। साथ ही यह हमें ऊर्जावान रहने की प्रेरणा देता है जिससे हम अपने उद्देश्य को पाने के लिए अनवरत रूप से कार्य करते रहे हैं।

सूर्य के विभिन्न नाम : आदित्य, अर्क, अरुण, भानु, दिनकर, रवि, भास्कर आदि।

सूर्य की प्रकृति: सूर्य नारंगी रंग का शुष्क, गर्म, आग्नेय और पौरुष प्रवृत्ति वाला ग्रह है। दिशाओं में यह पूर्व दिशा का स्वामी होता है जबकि धातुओं में यह तांबा और सोने का स्वामी होता है।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य का महत्व

वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह जन्म कुंडली में पिता का प्रतिनिधित्व करता है। जबकि किसी महिला की कुंडली में यह उसके पति के जीवन के बारे में बताता है। सेवा क्षेत्र में सूर्य उच्च व प्रशासनिक पद तथा समाज में मान-सम्मान को दर्शाता है। यह लीडर (नेतृत्व करने वाला) का भी प्रतिनिधित्व करता है। यदि सूर्य की महादशा चल रही हो तो रविवार के दिन जातकों को अच्छे फल मिलते हैं। सूर्य सिंह राशि का स्वामी है और मेष राशि में यह उच्च होता है, जबकि तुला इसकी नीच राशि है।

शारीरिक रूपरेखा: जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य लग्न में हो तो उसका चेहरा बड़ा और गोल होता है। उसकी आँखों का रंग शहद के रंग जैसा होता है। व्यक्ति के शरीर में सूर्य उसके हृदय को दर्शाता है। इसलिए काल पुरुष कुंडली में सिंह राशि हृदय को दर्शाती है। सूर्य पुरुषों की दायीं आँख और स्त्रियों की बायीं आँख को दर्शाता है।

रोग: यदि जन्म कुंडली में सूर्य किसी ग्रह से पीड़ित हो तो यह हृदय और आँख से संबंधित रोगों को जन्म देता है। यदि सूर्य शनि ग्रह से पीड़ित हो तो यह निम्न रक्त दाब जैसी बीमारी को पैदा करता है। जबकि गुरु से पीड़ित होने पर जातक को उच्च ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है। यह चेहरे में मुहांसे, तेज़ बुखार, टाइफाइड, मिर्गी, पित्त की शिकायत आदि बीमारियों का कारक होता है।

सूर्य की विशेषताएँ

यदि जन्मपत्री में सूर्य शुभ स्थान पर अवस्थित हो तो जातक को इसके शुभ परिणाम परिणाम मिलते हैं। सूर्य की यह स्थिति जातकों के लिए सकारात्मक होती है। इसके प्रभाव से लोगों को मनवांछित फल प्राप्त होते हैं और जातक स्वयं के अच्छे कार्यों से प्रेरित होते हैं। जातक का स्वयं पर पूरा नियंत्रण होता है।

बली सूर्य: ज्योतिष में सूर्य ग्रह अपनी मित्र राशियों में उच्च होता है जिसके प्रभाव से जातकों को अच्छे फल प्राप्त होते हैं। इस दौरान व्यक्ति के बिगड़े कार्य बनते हैं। बली सूर्य के कारण जातक के मन में सकारात्मक विचार पैदा होते हैं और जीवन के प्रति वह आशावादी होता है। सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति अपने जीवन में प्रगति करता है और समाज में उसका मान-सम्मान प्राप्त होता है। यह व्यक्ति के अंदर अच्छे गुणों को विकसित करता है।

बली सूर्य के प्रभाव: लक्ष्य प्राप्ति, साहस, प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता, सम्मान, ऊर्जा, आत्म-विश्वास, आशा, ख़ुशी, आनंद, दयालु, शाही उपस्थिति, वफादारी, कुलीनता, सांसारिक मामलों में सफलता, सत्य, जीवन शक्ति आदि को प्रदान करता है।

पीड़ित सूर्य के प्रभाव: अहंकारी, उदास, विश्वासहीन, ईर्ष्यालु, क्रोधी, महत्वाकांक्षी, आत्म केंद्रित, क्रोधी आदि बनाता है।

सूर्य से संबंधित कार्य/व्यवसाय: सामान्य तौर पर सूर्य जीवन में स्थायी पद का कारक होता है। यह हमारी जन्मपत्री में सरकारी नौकरी को दर्शाता है। यदि जिस नौकरी में सुरक्षा भाव सुनिश्चित होता है, वहाँ पर सूर्य का आधिपत्य भी सुनिश्चित होता है। कार्यक्षेत्र में सूर्य स्वतंत्र व्यवसाय को दर्शाता है। हालाँकि किसी व्यक्ति का करियर कैसा होगा, यह सूर्य की दूसरे ग्रहों से युति या संबंध से ज्ञात होता है। यहाँ कुछ ऐसे कार्य व व्यवसायिक क्षेत्र हैं जो सूर्य से संबंधित हैं – प्रशासनिक अधिकारी, राजा, अथवा तानाशाह।

उत्पाद: चावल, बादाम, मिर्च, विदेशी मुद्रा, मोती, केसरिया, जड़ी आदि।

बाज़ार: सरकारी देनदारी, स्वर्ण, रिज़र्व बैंक, शेयर बाज़ार आदि।

पेड़ पौधे: कांटेदार पेड़, घास, नारंगी के पेड़, औषधीय जड़ी बूटियों आदि।

स्थान: वन, पहाड़, किले, सरकारी भवन इत्यादि।

जानवर और पक्षी: शेर, घोड़ा, सूअर, नागिन, हंस आदि।

जड़: बेल मूल।

रत्नः माणिक्य।

रुद्राक्ष: एक मुखी रुद्राक्ष।

यंत्र: सूर्य यंत्र।

रंग: केसरिया

सूर्य के मंत्र

ज्योतिष में सूर्य ग्रह की शांति और इसके अशुभ प्रभावों से बचने के लिए ज्योतिष में कई उपाय बताये गए हैं। जिनमें सूर्य के वैदिक, तांत्रिक और बीज मंत्र प्रमुख हैं।

सूर्य का वैदिक मंत्र

ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।

सूर्य का तांत्रिक मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः
सूर्य का बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

ज्योतिष में सूर्य ग्रह कितना महत्वपूर्ण है, यह आपने समझ ही लिया होगा। हमारी पृथ्वी पर सूर्य के द्वारा जीवन संभव है। इसी कारण सूर्य को समस्त जगत की आत्मा कहा जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here